Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 10 March 2024
(गाजीपुर टूट जाता है)
(गाजीपुर टुट जाता है)
ऐ सियासत जब तेरी गलिज़गी से,,
कोई दहशत-ए-मसर्रत छुट जाता है।
तु बस सदन मे चीखता है,,
ऐ,रंग----यहाँ गहमर और------
गाजीपुर का हौसला टुट जाता है।
कश्मीरी अलगाव वादी दहशत गर्द के छोडने पे।
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