Wednesday, 13 March 2024

(बंजारन)

(बंजारन)
मेरी जिंदगी मे आई थी कभी-----
एक खानाबदोश बंजारन।
उसकी कत्थई आँखो को यादकर,
मै लिखता गया,लिखता गया,
न जाने कब-----
एक मुकम्मल किताब बन गई!
ऐ,रंग--------
वे खानाबदोश बंजारन।

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