Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 20 March 2024
(मां की तरह बात करती है)
(माँ की तरह बात करती है)
गर आँखे बांध के भी थमाओगे,
मेरे मूल्क की मिट्टी!
तब भी मै उसकी छुवन से पहचान जाऊँगा,
क्यूँकि ऐ,रंग---एकलौता है मेरा मूल्क,
जहाँ की मिट्टी भी-----------
माँ की तरह बात करती है।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment