Rangnath Dubey's Poems
Friday, 8 March 2024
(पति के हाथ से जली)
(पती के हाथ से जली)
कभी मिट्टी के तेल तो कभी तेज़ाब से जली,
औरत सीता भी हुई तो आग से जली।
ये दुनिया मर्दें शहर है आज भी,
गर मासुम सजी-सँवरी भी तो ऐ,रंग-----
अपने पती के हाथ से जली।
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