Rangnath Dubey's Poems
Friday, 15 March 2024
(घुंघरू बांधती थी)
(घुँघरु बांधती थी)
रईसो के दरमियां वे सलिके से जाती थी,
कभी ठुमरी,कभी दादरा गाती थी।
ऐ,रंग--वे पाक थी कोठे पे सुना है-----
कि केवल!वे पाँव मे घुँघरु बांधती थी।
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