Rangnath Dubey's Poems
Monday, 4 March 2024
(शबे महफिल)
(शबे भहफ़िल)
बेशक लौट जाना तुम सहर से पहले,
ऐ मेरे कातिल!
पर मै टुट के गाऊँगा कल के मुशायरे में,
है दिली ख्व़ाहिश कि तुम सामने रहना,
तुम नही मिली तो गम नही--
बस बीना आँसुओ के रोना चाहता हूँ,
कल मै शबे महफ़िल।
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