Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 1 May 2024
(बुखार में सोया है)
(बुखार में सोया है)
ऐ अमीरी कहाँ तेरी तरह--------
वे किसी तीज या त्योहार मे सोया है।
अपने मासूम बच्चो के दोज़ख के लिये,
ऐ,रंग----एक मज़दूर--------
पुरी रात बुख़ार में सोया है।
@@मज़दूर दिवस।
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