Rangnath Dubey's Poems
Friday, 31 May 2024
(घूंघट नही दिखता)
(घुँघट नही दिखता)
हा!मेरी खता है कि-----------
मै अब चाँद नही लिखता,,,,,,,,,,,,,,,,,,
पर क्या?करु ऐ,रंग--तरक्की के दौर मे
हमे औरत तो दिखती है-------
पर उसका घुँघट नही दिखता।
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