Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 29 May 2024
(मुसलमान है साहब)
(मुसलमान है, साहब)
ना ही पूजा
ना ही किसी मस्जिद की ,
अजान है, साहब.!
ये लड़की ,
इस दौर-ए-ग़ालिब की,
दीवान है , साहब!
बड़़े सलीके और
तमीज़ से ,
लिखा है कई रात ,
ये एक रात हिन्दू
तो एक रात मेरी ,
गज़लों की ----
मुसलमान है , साहब!
@ रंगनाथ द्विवेदी
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment