Friday, 31 May 2024

(अलकनंदा)

एक धरोहर अलकनंदा जो बनारस मे जन्मी भारत की प्रथम कत्थक नृत्यांगना थी, उसे आज अपने बनारस के लोग ही शायद भूल गये है. 

मेरी ये चंद लाइन महज़ एक कविता नही बल्कि एक दर्द है, जिसे पत्रकारिता जगत के कौटिल्य प्रदीप श्रीवास्तव सर ने पर्यटन की त्रैमासिक पत्रिका "प्रणाम पर्यटन " के इस बार के अंक मे स्थान दिया है.

(कत्थक की अलकनंदा)

 तुम धरोहर हो, 
 आज भी बनारस की---
 ऐ ! कत्थक की अलकनंदा.

वे तुम्हारे पांव
और कत्थक की, 
भंगिमाओ की स्मृति, 
मुझे बरबस खींच लाती है, 
तेरे घराने की तरफ, 
ये जानने के लिए ,कि क्या?? 
तुम बनारस को याद हो, 
या भूल गयी है, 
तुम्हें नई पीढ़ी ---
ऐ ! कत्थक की अलकनंदा. 

रचनाकार---रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जिला--जौनपुर pin.no.222002 (U P)
Mo.no.7800824758

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