Rangnath Dubey's Poems
Friday, 10 May 2024
(लोरी रह जाती है)
(लोरी रह जाती है)
माँ-------
मै ढ़ेरो खाता हूँ---------
पर तेरी चुपड़ी रोटी की भूख,रह जाती है।
आज सब कुछ है----
स्लिपवेल के गद्दे,ऐसी कमरे,,,,,,,,,,,,
पर नींद घंटो नही आती है।
ऐ,रंग--यादो में माँ की गोद------
और लोरी रह जाती है।
मदर्स डे स्पेशल।
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