Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 18 May 2024
(मुमताज सोई है)
(मुमताज़ सोई है)
ढक दो आज उसे------------
एै मेरी गज़लो के हर्फ,
वे कोई और नही मेरी महबूब है------
जो बेलिबास सोई है।
रख दो कुछ मिट्टी उसके सिरहाने,
एै मेरी गज़लो के हर्फ,
वे कोई और नही मुझ गरीब और मुफलिस की-------
मुमताज़ सोई है।
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