Tuesday, 28 May 2024

(ताबूत ना कहे)

(ताबूत ना कहे)

अभी लोकतंत्र जिंदा है
इसे भूत ना कहे,
सदन मंदिर है,
इसे ताबूत ना कहे,

खूब करे मोदी का विरोध
ये विपक्ष की खूबसूरती है,
लेकिन हमारे अमृत को आप 
जहर का घूट ना कहे.

"शेंगोल" सदन में रखे "भरत के त्याग के 
खड़ाऊ की तरह है",
आप भी आएंगे यही जीतकर,
प्लीज,अपना सर झुकाइए यहां,
भले ही आप
भाजपा के राम को सांप्रदायिक,
ओर सदन के बाहर
अयोध्या को अयोध्या
या अपने मूंह से
"चित्रकूट" को "चित्रकूट" ना कहे

आज सत्ता इनकी है
कल आपकी होगी,
प्लीज,
अपनी राजनीति की नीचता से,
इसे नेश्ते नाबूत ना करे 
अभी लोकतंत्र जिंदा है,
इसे भूत ना कहे,
सदन मंदिर है 
इसे ताबूत ना कहे .✍️✍️🙏🙏🙏🙏

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियापुर
जौनपुर, उत्तर प्रदेश

No comments:

Post a Comment