Sunday, 26 May 2024

(औरत)

(औरत इस ज़मी की पहली गज़ल है)
आसमा पे-------------------------
किसी मकबूल शायर से लिखी गई,
औरत------------
इस ज़मी की पहली गज़ल है।
बहुत बाद में तक्सीम हुये है सभी महल,
औरत इस ज़मी पे-----------------
पहली तराशी गई ताज़महल है।
कोई कुछ लिखे या उड़ेल दे खुद को,
पर लिख न सकेगा,
औरत------------------
इस ज़मी के झील की पहली कवल है।
ना हिन्दू बनाया,ना मुसलमान उसने,
गर बनाता तो खता होती,
इसी से ऐ,रंग---औरत----------------
इस ज़मी पे मोहब्बत की पहली शकल है।
आसमा पे------------------
किसी मकबूल शायर से लिखी गई,
औरत-----------------
इस ज़मी की पहली गज़ल है।

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