Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 13 July 2024
(सुकरात को भी ज़हर दे दो)
(सुकरात को भी ज़हर दे दो)
गर सच की ज़ुबां को
खामोश़ करना है,
तो ए,"रंग"
इस कलम के
"सुकरात" को भी---
ज़हर दे दो
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment