Wednesday, 24 July 2024

(महबूब के मेहंदी की रस्म)

(महबूब के मेंहदी की रस्म है)
रोऊँगा नही मै-------------------
आज मेरी महबूब के मेंहदी की रस्म है।
भीच लुंगा होंठ को दाँतो से कुचलकर,
एै खुदा चढ़े-------------------
उसकी हथेली पे इतनी सुर्ख मेंहदी,
कि सारा शहर कहे-----------------
किसी भी हथेली पे आज तलक इतनी
मेंहदी नही चढ़ी।
रोऊँगा नही मै----------------
आज मेरी महबूब के मेंहदी की रस्म है।
वे शरमा के हथेली से जब ढ़के चेहरा,
एै आह!मेरी उसको न देना बददुआ,
वे महबूब थी मेरी और महबूब रहेगी,
मै मरके भी दुआ दुंगा--------
महबूब को अपने।
एै,रंग-------रोऊँगा नही मै
आज मेरी महबूब के मेंहदी की रस्म है।

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