कल बड़ी मनहूस घड़ी थी----------------
पुरी अयोध्या आँख में आँसू लिये खड़ी थी।
ना राम मंदिर ना बाबरी मस्जिद,
सभी शरीक थे उस हूजुम में,
जैसे किसी छत पे------------
माँ सीता भी हाशिम के लिये खड़ी थी।
रामनवमी और दशहरे की रामलीला,
का किरदार था उनमें,
वे बस वादी थे-----------
वरना उनमें सरयू का वज़ु था,
ता उम्र उन्होनें-----------------
अपने ज़ुम्मे की नमाज़ एै,रंग
मुल्क की तरक्की,अमन और मोहब्बत के लिये पढ़ी थी।
कल बड़ी मनहूस घड़ी थी---------
पुरी अयोध्या आँख में आँसू लिये खड़ी थी।
###अयोध्या और बाबरी मस्जिद के वादी हाशिम अंसारी की इंतकाल पर मेरे गम के आँसू ।
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