Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 20 July 2024
(मुसलमान कह दिया)
(मूसलमान कह दिया)
मज़हबी नफरत को हमि ने सह दिया--
मालिक के घर को---------
मंदिर और मस्ज़िद कह दिया।
ऐ,रंग--जिस मासूम को हमे बच्चा कहना था-----------
उसे भी हमने हिंन्दू और मूसलमान कह दिया।
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