Saturday, 20 July 2024

(ताज महल)

(ताज़ महल)

ताज़ महल---
मोहब्बत की पाकीज़गी है
यहां मुमताज लेटी है

मत करो इन पत्थरो पे,
तुम सियासी वार

ए "रंग"
ये आबरु-ए-हिन्द है,
ना कि मुसलमान

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