Saturday, 6 July 2024

(हमारी मोहब्बत है)

(हमारी मोहब्बत है) 
ये पहाड़
और धुंधलि सी शाम, 
और ढेरो सायबान-----
हमारी मोहब्बत है. 
धिरे-धिरे हौले से चलती ठंडी हवा, 
तेरा शर्माना ,सकुचाना मेरी बाँह मे, 
और चारो तरफ फैला गुलाबी आसमान----
हमारी मोहब्बत है. 
हर तरफ एक संगीत, 
चरवाहो की बाँसुरी 
और अपने-अपने काम से लौटती ,
पहाड़ी लड़कियों की खिल-खिलाहट, 
अपने घोसलो की तरफ लौटते हुये परिंदे, 
के चह-चहाने की मीठी जुबान,
हमारी मोहब्बत है. 
आओ अब हम भी चले, 
एक-दुजे का हाथ थामे,
कुछ बतियाते, सपने बुनते
और घर आते-आते जो निकल आये चाँद, 
हमारी मोहब्बत है. 

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी. 
जज कालोनी, मियाँपुर 
जौनपुर----222002 (उत्तर-प्रदेश). 
 no. no. ----7800824758.

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है ।

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