ये पहाड़
और धुंधलि सी शाम,
और ढेरो सायबान-----
हमारी मोहब्बत है.
धिरे-धिरे हौले से चलती ठंडी हवा,
तेरा शर्माना ,सकुचाना मेरी बाँह मे,
और चारो तरफ फैला गुलाबी आसमान----
हमारी मोहब्बत है.
हर तरफ एक संगीत,
चरवाहो की बाँसुरी
और अपने-अपने काम से लौटती ,
पहाड़ी लड़कियों की खिल-खिलाहट,
अपने घोसलो की तरफ लौटते हुये परिंदे,
के चह-चहाने की मीठी जुबान,
हमारी मोहब्बत है.
आओ अब हम भी चले,
एक-दुजे का हाथ थामे,
कुछ बतियाते, सपने बुनते
और घर आते-आते जो निकल आये चाँद,
हमारी मोहब्बत है.
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियाँपुर
जौनपुर----222002 (उत्तर-प्रदेश).
no. no. ----7800824758.
यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है ।
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