Wednesday, 24 July 2024

(करोड़ों की इमारत में घुट रही है)

(करोड़ो की इमारत मे घुट रही है)
मुझे रुला के गई थी,वे बेवफ़ा-------
वहाँ खुश रहने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
पर उसकी हवस-ए-दौलत का ये सिला हुआ------------
कि वे आज ऐ,रंग---------
करोड़ो की इमारत मे घुट रही है।

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