Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 28 June 2023
(कामायनी की तरह पढ़ो)
("कामायनी" की तरह पढ़ो)
धूल की एक मोटी
परत सी जम गई हैं,
तेरे जाने के बाद,
मैंने भी पलटे नही,
अपने जिस्म के पन्ने,
आओ तुम मुझे,
दुर तलक ले चलो,
मेरे मनु---
और
अगले प्रलय तक
मुझे
"कामायनी" की तरह पढ़ो,
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment