एक अलहदा कशिश है इसके हूश्ऩ मे,
ये एक तहज़ीबे दुपट्टा है,
गर सर पे रख ले तो,
है चौदवी का चाँद उर्दू--------------
है इश्क़ की जुबान उर्दू ।
ये खते दौर के चाहने वालो को पता है,
कि कैसे पसंद करती थी,
इनकी जान उर्दू----------
है इश्क़ की जुबान उर्दू ।
वे पाजेब की छनक का मिठापन,
जब दिल लुट लेती थी,
तो लगता था जैसे,
कि यही रहती है इस पुरे मकान उर्दू----
है इश्क़ की जुबान उर्दू ।
ये जब अपने छत पे चढ़ तकने लगी,
तो यू लगा कि जैसे,
हो गई हो सुरमई शाम,
और पुरा आसमान उर्दू------
है इश्क़ की जुबान उर्दू।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)
mo.no.-----7800824758
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