(योग हर इंसान में उतरा है )
कौन कहता है कि
योग केवल-
"कृष्ण" और "राम" में उतरा है,
ये महज़ एक सियासत है--
वरना योग "इस्लाम" में उतरा है।
किसी पे "ऊँ" या "अल्लाह" क्यू थोपे,
गौर करिये--
मंदिर और मस्जिद मे कभी,
तो पूजा के तौर तरीके
गर योग से मिलते है,
तो योग का हर तरीका
उसी तरह--------
इनकी "नमाज़" में उतरा है।
आओ हम
भारत पे गर्व करे,
और पुरी दुनिया को दिखा दे,
कि हमारा योग--
मजहब या धर्म में नही,
बल्कि ऐ,रंग--
इस मूल्क के
हर एक इंसान में उतरा है।
No comments:
Post a Comment