Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 21 September 2024
(दो घाव हो गए)
( दो घाव हो गए)
जीन उरोजों को ढ़क,
वे मासूम देखती थी,
कभी वात्सल्य का सपना,
ए "रंग"-------
उसके वही दोनों उरोज,
गरीबी के चलते,
दो घाव हो गए.
@@@ रंगनाथ द्विवेदी,
जट कॉलोनी, मियापुर
जौनपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल नंबर--7800824758
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