Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 28 September 2024
(मेरी हीर लिए चल)
(मेरी हीर लिये चल)
मेरा दर्द,मेरी पीर लिये चल-----
ऐ भीड़---उस बेवफ़ा की,,,,,,,,,,
एक तस्ब़ीर लिये चल।
रुह़ानी गुफ्त़गु की खातिर ऐ,रंग-----
उसके घर की मिट्टी को-----
समझ मेरी हीर लिये चल।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment