पहली बार आपने ही तो पहनाई थी,
मेरी कलाई में ये चुड़ियाँ तीज की।
तब से अब तलक मेरी कलाई के साजन,
आपको ही बुलाती है सब के बीच से,
चुपके से----------------
खनक के ये चुड़ियाँ तीज की।
आप भी उठ आते है कर बहाना,
चुपके से पकड़ने हमें किसी तरह,
मै शर्मा जाती हूँ!
तो उस शर्म की घड़ी में,
बोलती है आपसे---------
ये चुड़ियाँ तीज की।
है मेरी इच्छा,है मेरी पूजा
कि सलामत रहे आप मै सुहागन रहुं,
आप पहनाते रहे इस कलाई मे मेरे,
मै पहनती रहुं आपसे उम्र भर------
ये चुड़ियाँ तीज की।
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