Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 24 September 2024
(किडनी बेच दू)
(किडनी बेच दू)
मैं कहां कमा सका
दो वक्त की रोटी.
उस पर बिटिया सयानी हो गई
सोचता हूं,कि
मैं उसकी ब्याह की खातिर
ऐ "रंग"––
शहर के किसी डॉक्टर को
अपनी किडनी बेच दूं.😢😢
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