जल गया-------
मोहब्बत के धोखे में,
जब सुशांत ने छुआ,
ये रीया माचिस.
अपने रूप और यौवन की,
तीली से---
इसने ऐसा जलाया
कि मोहब्बत के चारों तरफ
दिखने लगा,
सुशांत को अपनी खुदकुशी का,
ये दिलफ़रेब---
और धुंआ माचिस.
आओ बचे,
कहीं ऐसा ना हो कि
शहर दर शहर,
जान लेती फिरे ए "रंग "
ये बेवफा माचिस.
यह मेरा स्वरचित रचना है.
@@@ रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियापुर
जिला जौनपुर( उत्तर प्रदेश)
मोबाइल नंबर---7800824758
No comments:
Post a Comment