एक औरत---------
किसी सरिया के नाम पे
कैसे हो सकती है मजाक।
कैसे-----------
लिख सकता है कोई शौहर,
अपनी अँगुलियो से इतनी दुर रहके,
मोबाइल के वाट्सप पे----------
तीन मर्तबा तिलाक।
नही अब औरत को भी----------
उसके हिस्से की इस्लामिक ताकत बख्श़ो,
उसे भी हक दो!
कि वे ले सके एैसे मर्द से एै,रंग--------
तीन मर्तबा तिलाक।
@@@रचयिता-------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
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