Rangnath Dubey's Poems
Monday, 23 October 2023
(खपरैल के घर)
(खपरैल के घर)
मिट्टी की सोंधी गंध,
वे तितलियो के पर,,
वे खुला आसमान,
वे पीपल की हवा---
सब कुछ टिसता है मेरी यादो मे
ऐ,रंग--
इस फ्लैट की घुटन से कही अच्छे थे
मेरी गाँव मे खपरैल के घर.
@@@रंगनाथ द्विवेदी.
जौनपुर (उत्तर-प्रदेश )
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