Thursday, 26 October 2023

(हे! सूरज देव)

(हे!सुरुज देव)
क्या आरा,क्या छपरा,क्या बिहार हे!सुरुज देव, सबपे लुटाना अपना प्यार हे!सुरुज देव। नदिया के पानी में जब माँग भरे दुल्हन, अँजुली से अरघ दे-----------
तो सुनियेगा सबकी पुकार हे!सुरुज देव! क्या आरा,क्या छपरा,क्या बिहार हे!सुरुज देव। गुँजे किलकारी घर और आँगन में------ हर आँचल में भरना ये दुलार हे!सुरुज देव। भले पुरे साल नही लौटते है गाँव, पर तेरी खातिर आते है लेके परदेश से----- अपना पुरा का पुरा परिवार हे!सुरुज देव। मांगते है कविता और गीत की नदी में हम, दे शब्द अरघ आपसे-----------
कि रहे खुशहाल ये संसार हे!सुरुज देव, और अमर रहे धरती पे--------
डाला छठ का ये त्यौहार हे सुरुज देव।

 @@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी जज कालोनी,मियाँपुर जौनपुर।
mo.no.7800824758
----सभी को डाला छठ पर्व की ढ़ेरो बधाई।

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