(हमारी आस्था पर शोध ना करें)
राजनीति खूब करें
लेकिन सनातन
या किसी धर्म के लिए
क्रोध ना करें.
गीता प्रेस
हमारा धार्मिक मन और शरीर है,
ये संस्कार है
इसका विरोध ना करे.
गांधी हो
या कलाम सब ने पढ़ा है
कृपया! बंद कर दे!
आप महज
अगले चुनाव के लिए
हमारी आस्था पर
शोध ना करें.
यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.
रचनाकार--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
mo.no.7800824758.
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