Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 28 October 2023
(माँ)
माँ-
मै ढ़ेरो खाता हूँ,पर तेरी
चुपड़ी रोटी की भूख-
रह जाती है।
आज सबकुछ है,
स्लीपवेल के गद्दे,एसी कमरे
पर नींद-
घण्टो नही आती है।
ऐ रंग यादो मे-
माँ की गोद,
और लोरी रह जाती है।
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