Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 1 October 2023
(हे! राम)
(हे! राम)
आज भी-
अहिंसा के सिने पे
चला रहा है,गोली,
नाथूराम।
कब थमेगी ये हिंसा-
बन्दुको की ऐ रंग,
आखिर कब निकलेगा,
कातिल के होंठो से-
हे!राम।
गांधी जयन्ति पर।
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