Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 5 October 2023
(चिराग मजलूम की बस्ती में जलेगा)
ये कलम तेरे रियासत की तवायफ नहीं,
कि तेरी मसनद की अय्याशी के लिए
अपने पांवों में घुंघरू बांध ले,,
ऐ "रंग" यह वह चिराग है जो,
किसी मजलूम की बस्ती में जलेगा ✍️✍️
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