Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 24 October 2023
(कर्ण को)
(कर्ण को)
फिर किसी कुन्ती ने-
छोड़ा कर्ण को।
क्यूँ?नही मिल रहा
वात्सल्य थोड़ा कर्ण को।
कब तलक मानती रहेगी,
ये दुनिया-
रोड़ा कर्ण को।
ऐ रंग,-कब मिलेगा?
न्याय आखिर कर्ण को।
आज की कुन्ती ने फिर
खेत मे छोड़ा कर्ण को।
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