Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 28 October 2023
(गोवर्धन पूजते है)
(गोवर्धन पुजते है)
हम अपनी जड़ो को
कहाँ भुलते है।
आज भी लाखो कृष्ण
यही खेलते,
कुदते है।
ऐ रंग,-
हम प्रकृति प्रेमी है,
इसलिए,-
गोवर्धन पुजते है।
गोवर्धन पुजा की ढ़ेर सारी बधाई।
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