Monday, 29 January 2024

(मेरे जुड़े में गुलाब)

(मेरे जुड़े मे गुलाब)
मै आज भी----------
पहले छुवन सी सिहर उठती हूं!
जब आप टांकते हो मेरे जुड़े मे गुलाब।
सच मेरी इस खुशकिस्मती का अंदाज़ा,
शायद आप न करते हो,
पर मै अपनी शर्मिली आँख मुँदे,
जुड़े मे लगाते हुये इस गुलाब के फूल सी,
आपको अपने पुरे बदन पे महसुस करती हूं!
ये रोमानियत ही---------
हमारे और आपके प्यार के बीच,
कि वे घूँघट है----------
जिसे मै आधे निकले हुये चाँद की तरह,
अपने चेहरे पे डाले रखना चाहती हूं,
और नहाना चाहती हू----------
आपके मेरे जुड़े में लगाये हुये या टांके हुये,
इस गुलाब की तरह हर मौसम,
कि उस गुलाबी बूँद से,
जिससे निखर के खिलती है ये गुलाब------
और इस गुलाब की एक-एक पंखुड़ी।
बस यही इच्छा है कि-----------
मुझे एैसे ही चाहना ता-उम्र,
और एैसे ही टांकना मेरे जुड़े में गुलाब।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर-------उत्तर-प्रदेश।
mo.no.--------7800824758

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