मै मासुमो की लाशो पे मरसिया लिख रहा हूँ,
अभी कल बीता है लम्हे चेहल्लुम,
सीना फट गया हिन्दु का,कलम सदमे में है।
रोजा,नमाज,जकात,खैरात,हज़------
सब हराम है ऐ आतंकी मुसलमानो,,,,
आखिर तुम्ही बताओ इस,रंग को-------
आखिर मज़हब के नाम पे इतना कत्ल,
कुर्आन की किस आयत या पन्ने मे है।
@बेगुनाह लाशो को मुझ हकिर से शख्स़ का एक आँसु-ए-मरसिया।
मरसिया------शोकगीत।
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