Tuesday, 30 January 2024

(दर्द के हरम में है)

(दर्द के हरम मे है)
नहाने दे-
गीरने दे,ये अश्क़े गुलाब जल,
बढ़ेगी इससे तड़प की खूश़बु।
ऐ,रंग-
जानता है,उसकी याद अब भी,
मेरी दर्द के हरम मे है।

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