Saturday, 27 January 2024

(तवायफ की कब्र है)

(तवायफ की कब्र है)
  यहाँ चराग नही जलते,
  कोई चादर नही चढ़ती-
  ये शहर की मशहूर-तवायफ की कब्र है।
  आज भी करती है,ये रुहे मूज़रा-
  फिर फुट के रोती है।
ऐ,रंग-बस आ जाते है-
खिज़ा मे दरख्तो के चंद पत्ते-
आवारगी करने।
ये शहर के मशहूर,तवायफ की कब्र है।

खिज़ा-पतझड़
दरख्त़-वृक्ष।

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