Monday, 29 January 2024

(पुरानी कासगंज हूं)

कासगंज के दंगे का एक टिसता दर्द--------------
                     (पुरानी कासगंज हूँ)
मुझे तो सियासत ने जला दिया मेरे बेटो,
ठहरो------------
मै तुम्हारी माँ ,मौसी ,खाला और
वही पुरानी कासगंज हूँ।
मैने अपनी इन आँखो से ईद और होली देखि है,
लेकिन आज चौराहे पे खुशी नही,
बल्कि अपनो की लाश देख दंग हूँ-------
मै वही पुरानी कासगंज हूँ।
मुझे मेरी खुशी लौटा दो,
फेक दो ये असलहे,ये खंजर
खत्म हो जाये शहर और गली का ये सहमापन,
देखो मेरी सिहरन,
और नोच-खसोट के निशान,
मुझे भीख मे दे दो,
और लौटा दो मेरे बेटो मेरी खुशी,
क्योंकि मै सियासत नही----------
तुम्हारी वही वर्षो पुरानी कासगंज हूँ।
मुझे तो सियासत ने जला दिया मेरे बेटो,
ठहरो,
मै तुम्हारी माँ,मौसी,खाला---------
वही पुरानी कासगंज हूँ।

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी,
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

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