Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 14 January 2024
(संगम पर स्नान करती है)
(संगम पर स्नान करती है)
हमारी आस्था सभी को,
हैरान करती है,
कभी पूजा,
कभी अजान करती है.
एक तरफ शायर करता है वजू,"रंग"-
तो एक तरफ हमारी कविता भी-
संगम पे स्नान करती है.
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियापुर
जौनपुर 222002 (U P)
mo.no.7800824758
rangnathdubey90@gmail.com
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