Tuesday, 18 October 2022

(शीरी और फरहाद है दोस्त)
कहाँ मिले है मोहब्बत करने वाले---
ऐसा कोई वाकया,,,,,,,,,
तुम्हे याद है दोस्त।
मोहब्बत तो रेल की पटरियो पे कटी---
दो लाश है दोस्त।
सच तो ये है कि मोहब्बत आज भी----
शीरी और फरहाद है दोस्त।

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