Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 1 October 2022
(चाँद)
या तो शायर,
या तो फिर किसी कवि ने देखा।
ऐ रंग,-शर्म के घुँघट मे-
एक मुस्काता चाँद।
उनके बाद हमी ने देखा।
या तो शायर ,
या तो फिर किसी कवि ने देखा।
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