Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 27 October 2022
(खुदा की सरहदे)
इन लाशो और मौतो से,,,,,,,,,,,,,,
शायद---------
वे बताना चाहता है हमारी हदे।
क्यूकि ऐ,रंग--------
अब हम लाँघना चाहते है शायद------
खुदा की सरहदे।
भुकंम्प मे मरे सभी की आत्मा की शांति को एक साहित्यिक मौन।
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