Monday, 31 October 2022

अमृता प्रीतम की पुण्यतिथि पर मेरी श्रद्धांजलि 🌹🌹

( अमृता-प्रीतम और उसका अधूरा इमरोज )

मेरे इमरोज़---
मै तुम्हारे लिये छोड़े जा रही,
"एक तकिया तेरे नाम"।
काश ये गिलाफ-----
मै तुमपे चढ़ा पाती,
और बिछा पाती अपनी युवावस्था में---
एक बिस्तर तेरे नाम।

तुम मिले भी तो यु मुझसे,
कि जब जीवन की शाम--
के चंद धुंधलके ही मेरे पास बचे थे!
माफ!करना क्या करु?
बहुत जलाना चाहती हूँ---
तेरे अंदर रौशनी के लिये,
पर बुझ जाऊँगी-
मै बनके दिया एक शाम।

मेरे इमरोज़---
तुम मेरे और पास आओ,
टटोलो मुझको मैने बहुत कुछ लिखा है,
लेकिन---
इस अमृता प्रीतम का अधुरापन पढ़ो,
पढ़ पाये नही न!
जानती थी नही पढ़ पाओगे,
लो मेरी आखिरी साँस,
और आखिरी हिचकी,
खुद लिखे जा रही एक आखिरी किताब----
अमृता प्रितम और उसका
अधुरा इमरोज़।

रचयिता------रंगनाथ द्वीवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जिला--जौनपुर pin no.222002 ( उत्तर-प्रदेेश)
mo.no-----7800824758

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