Tuesday, 4 February 2025

(आडवाणी)

(आडवाणी)

त्याग में भरत
और तपस्या में लक्ष्मण
मै पूछता हूं कौन है?
जो ठुकरा सके
सत्ता शिखर
और राजवाणी .
इसलिए
ये मान लेना ही उचित है कि ,
इस दर्प युग में
है अकेले आडवाणी.

समय चक्र की धुरी है
जो घूमती है,
लेकिन मातृभूमि
ऐसे हर ललाट को
खुद चूमती है
एक गर्जना एक सर्जना
एक अटल,एक आडवाणी .

वे राम रथ
और राम पथ के
सारथी है
वे प्रण,पताका राम के है
राष्ट्र के है
भारत रत्न के उद्दघोष में
होठ है .
मोदी के लेकिन 
पुत्र सत्ता से इतर है
यह सिख दी है
अब तलक,
वे कौटिल्य है
गुरु है
ना कि ,केवल आडवाणी.

यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है.

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियापुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)

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