Rangnath Dubey's Poems
Monday, 17 February 2025
चांदनी रात
आज अपनी जीवन संगिनी के जन्मदिन पर----
मैं अपनी हार, तेरी जीत लिख दूं.
तु कहे तो –
इस कायनात की हर शै में, मैं प्रीत लिख दूं.
तुम्हें पढूं
और पढ़ते-पढ़ते खो जाऊं इस कदर
कि खुद को तुम्हारी सांस का "नीरज"
और तुम्हारे चेहरे को
चांदनी रात लिख दूं.
रंगनाथ द्विवेदी
संग
जीवन संगिनी✍️✍️✍️✍️✍️
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